Friday, January 1, 2021

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The station will reflect on the world's longest-running serial drama across its output on Friday.

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नए साल पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा ने भास्कर के पाठकों के लिए विशेष संदेश दिया है। दैनिक भास्कर के रितेश शुक्ल से एक घंटे से भी ज्यादा लंबी बातचीत में उन्होंने 2021 की उम्मीदों, हमारी ताकत और चिंताओं पर अपने विचार रखे। इस बातचीत का सार एक आर्टिकल के रूप पेश है...

नए वर्ष में दूसरों के विचारों के प्रति समझ और सहिष्णुता हमारी ताकत

कोविड काल की शुरुआत में ऐसा लगा कि ईश्वर ने आराम का अवसर दिया है लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया स्थितियां बदलती गईं। हमें अपने काम से मिलने वाली संतुष्टि का स्तर हर दिन घटता गया क्योंकि हफ्ते के सारे दिन और सारे हफ्ते एक जैसे दिखने लगे। रविवार और सोमवार का फर्क कर पाना मुश्किल हो गया। हर रात को नींद आने से पहले बीते दिन के बारे में सोचो तो यही लगता कि हम जितना कर सकते थे, उतना नहीं कर पाए।

यह स्थिति कब बदलेगी

सच पूछिए तो इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं है। अगर कोई कहता है कि वह उत्तर जानता है तो वह संभवत: सच नहीं बोल रहा है। साल बदल रहा है और अगर आप मुझसे पूछें तो मैं नए साल में खुद के लिए दूसरों के विचार समझने की बेहतर बुद्धि ईश्वर से मांगूंगा। दूसरों के दृष्टिकोण समझना और उनके प्रति सहिष्णुता ही हमारी ताकत है।

महामारी ऐसी ताकत है जिसका सम्मान करते हुए सामना करना होगा

मुझे लगता है कि दुनिया में अलग-अलग चक्र चलते रहते हैं। बिजनेस का चक्र, स्वास्थ्य का चक्र...महामारी का चक्र। समय-समय पर कोई चक्र ऊपर उठता है तो लगता है कि वह दूसरे सभी चक्रों पर हावी हो गया है, मगर यह हमेशा नहीं रहता। एक समय था जब लग रहा था कि एचआईवी मानव जाति को लील जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुझे लगता है कि कोविड के प्रश्न का भी हम ऐसा कोई उत्तर ढूंढ पाएंगे जो कम से कम इस वायरस की मारक क्षमता को बहुत हद तक कम कर देगा। संभव है आप विपरीत तर्क दें और आप सही भी हो सकते हैं। आखिर यूके और यूरोप में लोगों ने कोविड के असर को नकार दिया था लेकिन आज वहां लॉकडाउन दोबारा लागू है। मैं न तो बहुत आशावादी या निराशावादी प्रतीत होना चाहूंगा। मै सतर्क रहना चाहूंगा ताकि साफ-सफाई रहे, मास्क का उपयोग होता रहे। हमें विनम्र होने की आवश्यकता है ताकि हम एहसास कर सकें कि यह वायरस बहुत ताकतवर है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम अंधविश्वासी हो जाएं। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि हमें इस परिस्थिति का आदर करते हुए सामना करने की जरूरत है।

प्रेरित युवा ही राष्ट्र की शक्ति

हमें कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाने कि जरूरत है। आखिर क्यों आज दुनिया कि टॉप कंपनियों का नेतृत्व भारतवंशी कर रहे हैं। दूसरा सवाल यह कि इन चुनिंदा लोगों के बाद हमें भारतवंशियों की संख्या ज्यादा क्यों नहीं दिखती? जबकि टॉप तक पहुंचे कई लोगों ने उसी संस्थान में निचले स्तर से काम शुरू किया था। वजह शायद यह है कि शीर्ष पर अवसर कम हैं। वहीं क्या वजह है कि इतनी बड़ी तादाद में भारत के लोग रोजगार पाने में भी असमर्थ हो रहे हैं? इतिहास गवाह है कि जो लोग नए समय में उत्पन्न हुई आवश्यकताओं को पूरा करने कि कोशिश करते हैं वे आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में हमें इस बात पर गौर करने कि आवश्यकता है कि क्या हमारे पास ऐसी व्यवस्था और वातावरण है जो रचनात्मकता को बढ़ावा दे सके? क्या युवाओं के लिए ऐसा माहौल है जिसमें अगर वो नवाचार के बारे में सोच सकते हों तो उन्हें क्रियान्वयन का भी साहस और सहयोग प्राप्त हो सके? आखिरकार जब यह महसूस होने लगा कि प्रदूषण समस्या है तब बैटरी से चलने वाले वाहनों की कल्पना हुई और आज साकार हो पा रही है। सफलता-असफलता से आगे जा कर जब तक रचना शैली, प्रयत्नशीलता और जुझारूपन को तवज्जो नहीं मिलेगी तब तक युवा नवाचार की राह पर कैसे चल पाएगा? मुझे लगता है कि प्रेरित युवा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। प्रेरणा और प्रयत्न को संरक्षित करना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए बाकी सब ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए।

कौशल से दूर होगी बेरोजगारी

आम तौर पर यह माना जाता है कि जॉब मार्केट में अनस्किल्ड, सेमीस्किल्ड और हाईली स्किल्ड लोग हैं। लेकिन ऑटोमेशन की वजह से एक ऐसा क्षेत्र उभरा है जिसके लिए उपयोगी कौशल, किसी डिग्री या डिप्लोमा पर निर्भरता नहीं है। मेरा मानना है कि वो जिन्हें हम प्रवासी मजदूर कहते हैं उनके पास भी विशिष्ट किस्म का कौशल है, लेकिन वे ऐसे दूषित वातावरण में हैं कि उनका श्रम सुरक्षित नहीं है। दूसरे विश्वयुद्ध में अमेरिका जब शामिल हुआ तब सैन्य उपकरण उद्योग को वहां की गृहिणियों ने संभाला। 1970 के दशक में जब तकनीक का चरम इलेक्ट्रॉनिक सर्किट हुआ करता था, तब चीन की महिलाओं ने माइक्रोस्कोप में देखते हुए तेजी से सर्किट जोड़े और तब तक जोड़ती रहीं जबतक वही काम रोबोट ने 10 गुना तेजी से करना शुरू नहीं कर दिया। पूछने योग्य प्रश्न यह है कि असल में बेरोजगारी है कहां? जहां कौशल को अवसर नहीं मिलता वहीं बेरोजगारी होती है। हमें ऐसा नेतृत्व चाहिए जो यह संकल्प लेकर मैदान में उतरे कि काम की आवश्यकता अनुसार लोगों के कुछ हिस्सों को प्रशिक्षित किया जा सके। आज सरकार कौशल विकास की दिशा में बेहद गंभीर है लेकिन बड़ा प्रश्न यह भी है कि कौशल प्राप्त करने बाद लोग देश में रहेंगे या मध्य एशिया या धरती के अन्य हिस्सों में जा बसेंगे? आखिर नर्सिंग और मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नीशियन के क्षेत्र में यही तो हो रहा है। हमें असफलताओं में भी निवेश करने की हिम्मत रखनी होगी।

अगर कुछ चुनिंदा लोग ही हों जिनसे हम महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर मांगें तो हम बहुत कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। एक समय था जब टाटा या बिड़ला या अन्य ऐसे बड़े औद्योगिक घराने थे जिनकी कार्यप्रणाली का अनुसरण करना बेहद मुश्किल था। आज ऐसे लोगों के उदाहरण बहुतायत में उपलब्ध हैं जिनके पास एक आइडिया था जिसे जमीन पर उतारकर उन्होंने संपन्नता हासिल की। उदाहरण के तौर पर मैं एक स्टार्टअप के साथ काम कर रहा हूं। मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। लेकिन क्या मैं अपने अर्जित ज्ञान को कैटेलॉग कर पा रहा हूं? नहीं, मैं नहीं कर पा रहा हूं। जब हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो अपनी असफलताओं से सीखने का अवसर खो देते हैं। अपनी असफलताओं को हमें सफलता के मार्ग में मील के पत्थरों के रूप में देखना होगा। भारत में एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां किसी नवाचार को यह जानते हुए भी लागू किया जा सके कि यह असफल हो सकता है। इन्हीं असफलताओं से मिला ज्ञान हमें सफलता तक पहुंचाएगा।

टेक्नोलॉजी को क्लाइमेट चेंज पर भी सोचना होगा

मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि आज हम क्लाइमेट चेंज को गंभीरता से ले रहे हैं। कुछ दशकों पहले लोगों के लिए यह सोचना भी अजीब था कि समय और पैसे खर्च किए जाएं ताकि हमें साफ-सुथरा नीला आकाश देखने को मिल सके। सांस लेने के लिए प्रदूषण रहित वायु उपलब्ध हो। हम अपनी अगली पीढ़ी को क्या देने जा रहे हैं, इस बात को नजरअंदाज कर रहे थे। आज भी कुछ लोग कह सकते हैं कि हमें जलवायु पर ध्यान देने से ज्यादा भोजन की उपलब्धता पर समय और पैसा खर्च करने की जरूरत है। लेकिन अब देर करना घातक साबित हो सकता है। कुछ जगहों पर तो पहले से ही देर हो चुकी है। मुझे लगता है कि जब भी हमें अपनी जेब में हाथ डालना पड़ता है उस खर्च के लिए जिसका तात्कालिक लाभ न हो तो उस खर्च का विरोध स्वाभाविक है। लेकिन आज हम ग्लेशियर के पिघलने, मछलियों के लुप्त हो जाने और प्रदूषित हो रहे जल, भोजन और वायु को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हमेशा कुछ लोग ऐसे होंगे जो कहेंगे कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन हम मानें या ना मानें फर्क तो पड़ेगा ही। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अगर इस समस्या को सुलझाने में नहीं किया गया तो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले ही नहीं बचेंगे।



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नए साल पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा ने भास्कर के पाठकों के लिए विशेष संदेश दिया है।


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आखिर 2020 विदा हो ही गया। पूरी दुनिया 2021 को उम्मीदों भरी निगाहों से ताक रही है। सबसे बड़ी आस कोरोना वैक्सीन से है। और हो भी क्यों न। आखिर पूरा 2020 कोरोना को झेलते ही तो बीता है।

(2021 इस सदी के लिए उम्मीदों का सबसे बड़ा साल है। वजह- जिस कोरोना ने देश के एक करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में लिया, उसी से बचाने वाली वैक्सीन से नए साल की शुरुआत होगी। इसलिए 2021 के माथे पर यह उम्मीदों का टीका है।)

दुनियाभर के लोग पूरे साल जानलेवा कोरोनावायरस की लाल तस्वीर देखते रहे। वैज्ञानिकों ने इसे Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus-2 यानी SARS-CoV-2 नाम दिया है। तो आइये नए साल के पहले दिन देखते हैं उस अनोखे पार्टिकल की तस्वीर जो हू-ब-हू कोरोनावायरस की तरह दिखता है। इसके चारों ओर भी कोरोनावायरस की तरह स्पाइक्स हैं। लेकिन, यह एकदम उलटा काम करता है। यह कोरोना फैलाता नहीं, बल्कि उसके वायरस को मारता चलता है।

यह तस्वीर है- कोरोना के VLP (Virus like particle) यानी कोरोनावायरस जैसे पार्टिकल की। इसे प्रकृति ने नहीं बल्कि कोरोना की काट तलाश रहे वैज्ञानिकों ने बनाया है।

वायरस लाइक पार्टिकल (VLP) की तस्वीर वैज्ञानिकों ने कंप्यूटराइज्ड 3डी तकनीक से तैयार की है। कोरोना वायरस से अलग दिखाने के लिए इसका रंग हरा रखा गया है।

कहते हैं न कि दुश्मन को मारने के लिए उसके जैसे वेष में ही उसकी सेना में घुस जाओ। ठीक उसी अंदाज में VLP को भी हू-ब-हू कोरोनावायरस की तरह प्रोटीन से बनाया गया है। इन पार्टिकल्स से दुनिया भर में कोरोना की कई वैक्सीन तैयार की जा रही हैं। इनमें कई वैक्सीन्स के क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।

माइक्रोस्कोप से ऐसा दिखता है VLP, एकदम कोरोनावायरस की तरह

कनाडा की फार्मा कंपनी मेडिकागो की ओर से जारी VLP की तस्वीर।
पहली तस्वीर कोरोना वायरस की है और दूसरी उसकी तरह दिखने वाले VLP की।

VLP को शरीर कोरोना वायरस समझेगा और उन्हें मारने की ताकत जुटा लेगा

आइडिया यह है कि वैक्सीन के जरिए जैसे ही VLP इंसानी शरीर में पहुंचेंगे तो वह धोखा खा जाएगा। हमारे शरीर को लगेगा कि कोरोनावायरस आ गया है और वह इसे मारने के लिए अपनी प्रतिरोधक तंत्र को सक्रिय कर देगा।

हमारे शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटी-बॉडीज बनना शुरू हो जाएंगे। वह भी इतनी तादाद में कि कई महीनों या साल तक अगर हमारे शरीर का सामना असली कोरोनावायरस से होता है तो पहले से तैयार एंटी-बॉडीज उसे मार देंगे।

इस वैक्सीन से कोरोना होने का कोई डर नहीं

दूसरी तकनीकों से बनने वाली कई वैक्सीन्स की तरह इन पार्टिकल से बनने वाली वैक्सीन से कोरोना होने का बिल्कुल भी डर नहीं। दरअसल, इनमें किसी भी वायरस की जान, यानी जेनेटिक मेटेरियल ही नहीं है। यह पार्टिकल्स कोरोनावायरस की तरह होने के बावजूद अपनी संख्या बढ़ा नहीं सकते।

कनाडा की कंपनी पौधों से बनाई सस्ती वैक्सीन, भारत में भी कवायद

दुनिया की कई कंपनियां इस नई टेक्नोलॉजी से वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। अब तक स्तनधारियों से लिए गए प्रोटीन के जरिए यह पार्टिकल बनाए जा रहे थे, लेकिन कनाडा की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Medicago ने मात्र 20 दिनों में पौधों के प्रोटीन से कोरोना के VLP बना लिए हैं।

कंपनी का दावा है इस टेक्नोलॉजी से तैयार वैक्सीन बेहद सस्ती, कम समय और कम जगह में तैयार होगी। कंपनी ने इस आधार पर कोरोना वैक्सीन विकसित कर ट्रायल जुलाई में ट्रायल शुरू किए। इस तकनीक से वैक्सीन तैयार करने में एंटीजन की बेहद कम मात्रा में जरूरत होती है। ऐसे में कम खर्च में वैक्सीन से ज्यादा डोज तैयार की जा सकती हैं।

भारत में हैदराबाद की जीनोम वैली में स्थित फार्मा कंपनी बायोलाजिकल E ने VLP आधारित कोरोना वैक्सीन तैयार की है। जिसके phase-1 और phase-2 के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं।

पौधों को बायो-रिएक्टर बनाकर तैयार होता है वैक्सीन का कच्चा माल

परंपरागत रूप से वैक्सीन के लिए एंटीजन बनाने के लिए जीवित वायरस को मारकर विभाजित किया जाता है। इसके लिए भारी संख्या में वायरस की जरूरत होती है। इसके काम में आमतौर पर मुर्गी के चूजों के भ्रूण या निषेचित अंडों को बायो-रिएक्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मतलब अनुकूल वातावरण बनाकर इनमें ही भारी संख्या में वायरस पैदा किए जाते हैं।

जबकि, VLP वाली वैक्सीन में वायरस जैसे पार्टिकल्स को भारी संख्या में बनाने के लिए पौधों को बायो-रिएक्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह वैक्सीन बनाने का कच्चा माल यानी एंटीजन न केवल कम समय में बल्कि बेहद कम लागत से तैयार हो जाता है। इससे वैक्सीन भी सस्ती और तेजी से तैयार की जा सकती है।



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Coronavirus; First Image Of Virus-Like Particle (VLP) COVID Vaccine


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Thursday, December 31, 2020

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Bhaskar Cartoon | Bhaskar Toon | Today News and Updates | Corona stops PM's world tour, he was seen on TV every now and then


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नमस्कार!
कर्मचारियों को EPF पर 8.5% का एकमुश्त ब्याज मिलेगा। कोरोना के नए स्ट्रेन के खतरे के बीच ब्रिटेन से लौटे कई लोग गायब हैं। यमन में एयरपोर्ट पर ताकतवर ब्लास्ट हुआ। बहरहाल शुरू करते हैं न्यूज ब्रीफ।

सबसे पहले देख लेते हैं मार्केट क्या कह रहा है -

  • BSE का मार्केट कैप 187.98 लाख करोड़ रुपए रहा। 52% कंपनियों के शेयरों में बढ़त रही।
  • 3,134 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। 1,650 कंपनियों के शेयर बढ़े और 1,313 के शेयर गिरे।

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजकोट में वीडियो कॉन्फ्रंसिंग के जरिए AIIMS की नींव रखेंगे।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक CBSE बोर्ड परीक्षा की तारीखों का ऐलान करेंगे।

देश-विदेश
थोड़ी सरकार झुकी, थोड़ा किसान

किसान आंदोलन के 35वें दिन सरकार और किसानों के बीच 36 का आंकड़ा खत्म होता दिखा। कृषि कानूनों पर किसान संगठनों और केंद्र के बीच बुधवार को विज्ञान भवन में सातवें दौर की बैठक हुई। पांच घंटे तक चली मीटिंग में सरकार थोड़ी झुकी, तो किसान भी थोड़े नरम पड़े। सरकार ने किसानों की चार में से दो मांगें मान लीं। बाकी दो मांगों पर बातचीत के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की गई है। पराली जलाने और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट को लेकर केंद्र और किसान रजामंद हो गए। वहीं, MSP को कानून का दर्जा देने पर अगली बैठक में चर्चा होगी।

ITR फाइल करने की तारीख बढ़ी
सरकार ने इनकम टैक्स फाइल करने का समय बढ़ा दिया है। अब 10 जनवरी तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, 28 दिसंबर तक कुल 4.37 करोड़ ITR भरे गए थे। वे व्यक्तिगत इनकम टैक्स भरने वाले जिनके खातों के ऑडिट की जरूरत नहीं है, वे 10 जनवरी तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। वहीं, जो लोग टैक्स देते हैं और उनका खाता ऑडिट होता है और वे लोग जिन्हें इंटरनेशनल फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की रिपोर्ट देनी होती है, उनके लिए ITR का समय 15 फरवरी तक बढ़ाया गया है। इसी के साथ सरकार ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की आखिरी तारीख बढ़ाकर 15 जनवरी 2021 कर दी है।

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
सरकार की तरफ से कर्मचारियों के लिए नए साल से पहले बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने 2019-20 के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) पर 8.5% का एकमुश्त ब्याज देने का प्रस्ताव मान लिया है। मुमकिन है कि ब्याज की यह रकम 31 दिसंबर 2020 तक कर्मचारियों के खाते में पहुंच जाए। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि ब्याज दर से जुड़े प्रस्ताव पर इसी हफ्ते श्रम और वित्त मंत्रालय की बैठक हुई थी। इसी बैठक में EPFO को एकमुश्त 8.5% ब्याज देने की इजाजत मिली।

नए साल में ब्रिटेन की फ्लाइट्स पर ब्रेक
देश में ब्रिटेन में मिले ज्यादा खतरनाक कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। बुधवार को 13 नए मरीज मिले। इस बीच सरकार ने ब्रिटेन जाने-आने वाली उड़ानों पर रोक 7 जनवरी तक बढ़ा दी है। पहले 22 दिसंबर की आधी रात से 31 दिसंबर तक यह रोक लगाई गई थी। इसके अलावा सरकार ने सभी इंटरनेशनल कमर्शियल फ्लाइट्स पर लगा प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ा दिया है। स्पेशल और कार्गो फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

कोरोना के नए स्ट्रेन से देश में स्ट्रेस
कोरोना के नए स्ट्रेन के खतरे के बीच देश में एक महीने में ब्रिटेन से लौटे करीब 33 हजार लोगों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। बिहार, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में UK से आए लोगों की ट्रेसिंग नहीं हो पा रही है। कई यात्रियों ने पता और नंबर गलत बताया है, जिससे ट्रेसिंग में दिक्कत आ रही है। पंजाब में सबसे ज्यादा 3 हजार 426 लोग ब्रिटेन से लौटे, इनमें से 2 हजार 426 ट्रेस नहीं हुए। वहीं, महाराष्ट्र में 1200 से लोग लौटे, जिनमें पुणे के 109 लोग लापता हैं।

बिहार में बयानवीरों का दंगल
बिहार में RJD और JDU के बीच एक-दूसरे के विधायकों को तोड़ने के मुद्दे पर लगातार बयानबाजी हो रही है। RJD नेता श्याम रजक ने JDU के 17 विधायक तोड़ने का दावा किया, तो सत्तारूढ़ JDU के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि श्याम रजक मुगालते में हैं। उनके तीन दर्जन विधायक JDU के संपर्क में हैं। वे कभी भी RJD छोड़कर JDU में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, CM नीतीश कुमार ने कहा है कि ऐसे दावों में कोई दम नहीं है।

एक्सप्लेनर
सर्दी भगाने के लिए शराब है खराब

मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिन तक उत्तर भारत के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड पड़ने की चेतावनी जारी की है। अगले कुछ दिनों तक हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। इन राज्यों में अधिकतम तापमान 3 से 5 डिग्री तक गिर सकता है। इसके साथ ही IMD ने एक एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि ठंड से बचने के लिए लोग शराब का सेवन नहीं करें। सर्दी में शराब कैसे बन सकती है खतरा, यहां पढ़िए..

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पॉजिटिव खबर
अंजीर की खेती से 1.5 करोड़ का टर्नओवर

आज की कहानी महाराष्ट्र के दौंड के रहने वाले समीर डॉम्बे की। समीर ने 2013 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। एक मल्टीनेशनल कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट भी हो गया। सैलरी भी बढ़िया थी। लेकिन, जॉब सैटिस्फेक्शन नहीं था। वो कुछ इनोवेटिव करना चाहते थे। 2014 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अंजीर की खेती करने का फैसला किया। आज देशभर में उनके प्रोडक्ट बिकते हैं। सालाना 1.5 करोड़ उनका टर्नओवर है।
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फिर सुर्खियों में शाहीन बाग
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गोली चलाने वाले कपिल गुर्जर ने बुधवार को भाजपा (BJP) जॉइन कर ली। इस दौरान उसने कहा कि हम भाजपा के साथ हैं। मैं RSS के साथ भी जुड़ा हूं। कपिल गुर्जर ने दिन में भाजपा ज्वाइन की, शाम तक उसके शाहीन बाग केस में शामिल होने की बात सुर्खियां बन गई। इसके बाद भाजपा ने उसकी मेंबरशिप कैंसिल कर दी। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को इस मामले में सफाई देनी पड़ी।

यमन में एयरपोर्ट पर धमाका
अरब देश यमन के अदन एयरपोर्ट पर बुधवार को बड़ा धमाका हुआ। ब्लास्ट से ठीक पहले देश की नई कैबिनेट के मंत्रियों को लेकर एक विमान लैंड हुआ था। विमान के उतरते ही उसके पास यह धमाका हुआ। ब्लास्ट में 22 लोगों के मारे जाने की खबर हैं। हालांकि, ब्लास्ट की तीव्रता को देखते हुए यह आंकड़ा बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में प्रधानमंत्री मीन अब्दुल मलिक सईद भी मौजूद थे। किसी मंत्री के घायल होने की सूचना नहीं है।

सुर्खियों में और क्या है

  • रणथंभौर जा रहे भारतीय टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन की कार का सवाईमाधोपुर के पास एक्सीडेंट हो गया। हालांकि एयरबैग खुल जाने से उन्हें चोट नहीं आई।
  • पंजाब सरकार ने 1 जनवरी से नाइट कर्फ्यू हटाने का फैसला किया है। राहत होटल, रेस्टोरेंट को बड़ी राहत मिली है। अब इनडोर में 200 और आउटडोर में 500 लोग जमा हो सकते हैं।
  • फाइजर की वैक्सीन लगवाने के आठ दिन बाद अमेरिका के एक हेल्थ वर्कर की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। कैलिफोर्निया में रहने वाले इस शख्स का नाम मैथ्यू डब्ल्यू है।


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'Mitron' app kya hai/what is 'mitron' app

                    मितरोन एप क्या है Mitron एक सोशल मीडिया एप्लिकेशन है।mitron ऐप को भारत में एक आईआईटी के छात्र ने बनाया है। उसका नाम श...